सूर्य ग्रहण से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और रोचक तथ्य

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भारत के कई लोग सूर्य ग्रहण से सम्बन्धित जुडी बातो को अंधविश्वास मानते है, जबकि वैज्ञानिक के अनुसार सूर्य ग्रहण से सम्बन्धित जानकारी खगौलीय विज्ञान की घटना के अंतर्गत आती है.

हिंदू धर्म के लोग सूर्य ग्रहण का बहुत महत्व देते है.

Full Solar Eclipse

सूर्य ग्रहण क्या है ?

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चन्द्रमा आता हे, तो चन्द्रमा की छाया पृथ्वी पर पढती है और उस भाग में सूर्य दिखाई नही देता है, इस स्थति को ही सूर्य ग्रहण कहते है. ऐसी स्थति अमावस्या के दिन ही आती है.

सूर्य ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते है.

  1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
  2. आंशिक सूर्य ग्रहण
  3. वलयाकार सूर्य ग्रहण
Solar Eclipse Types

1) पूर्ण सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थति तब आती है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है, और सूर्य कुछ देर के लिए पूरी तरह से चंद्रमा के पीछे छिप जाता है इसके फलस्वरूप सूर्य की रोशनी पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पाती है और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, तो इस प्रकार की घटना, पूर्ण सूर्यग्रहण कहलाती हैं.

2) आंशिक सूर्य ग्रहण

आंशिक सूर्य ग्रहण की स्थति तब आती है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है, लेकिन सूर्य का कुछ ही भाग चन्दमा के द्वारा ढका होता है, इसमें सूर्य का कुछ भाग ग्रहण से प्रभावित और कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है, इस प्रकार की घटना, आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाती है.

3) वलयाकार सूर्य ग्रहण

वलयाकार सूर्य ग्रहण की स्थति तब आती है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है, लेकिन इस स्थति में चन्द्रमा पृथ्वी से काफ़ी दूर रहते हुए चन्द्रमा सूर्य को इस प्रकार से छिपाता हे की सूर्य का केवल बीच वाला हिस्सा ही छुपा हुआ रहता है, इसे पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूरी तरह चन्द्रमा से ढका हुआ दिखाई नहीं देता है. और सूर्य का केवल बाहरी हिस्सा ही प्रकाशित या चमकीला वलयाकार हुआ दिखाई पडता है, तो ये वलयाकार होने के कारण इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है.

सूर्य ग्रहण में क्या न करें

  1. ग्रहण के दिन पेड़ो से पत्ते और फूल नहीं तोड़ना चाहिए.
  2. ग्रहण के समय खाना नही खाना चाहिए.
  3. बाल कटवाना, वस्त्र धोना और स्नान नहीं करना चाहिए.
  4. ग्रहण के समय सोना, मल-मूत्र मैथुन आदि नही करना चाहिए.
  5. ऐसा माना जाता है की ग्रहण के समय सूर्य को नगन आखो से नही देखना चाहिए.

जो सूर्य ग्रहण को मानता है, उसे ये सब काम ग्रहण के समय नही करने चाहिए, इनका विशेष रूप ध्यान रखना चाहिए.

सूर्य ग्रहण में क्या करें

  1. ग्रहण के समय पेड़ पोधो को पानी पिलाना चाहिए.
  2. पक्षियों को अन्न और गायो को चारा देना चाहिए .
  3. जितना हो सके उतना दान-पूर्ण करना चाहिए.
  4. विशेष कर पाठ-पूजा का ध्यान रखना चाहिए

गर्भवती महिलाओं के लिए सूर्य ग्रहण का विशेष असर

सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। और ये बोला जाता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर में ही रहना चाहिए.

गर्भवती महिलाओं पर सूर्य ग्रहण का काफी ज्यादा असर पडता है, क्योकि उनके गर्भ में पल रहा शिशु बहुत ही नाजुक और संवेदशील होता है

जब सूर्य से नकारात्मक उर्जा पृथ्वी पर गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु पर
पड़ती है तो इस नकारात्मक उर्जा का असर गर्भवती महिला और शिशु दोनों पर पडता है.

अगर ग्रहण के समय इन बातो का ध्यान ना रखे तो होने वाले शिशु में कुछ ना कुछ कमी होती है.

सूर्य ग्रहण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  1. माना जाता है कि चीनियों की तरह बेबीलोन के निवासी भी ग्रहण की भविष्यवाणी करने मेँ समर्थ थे। उनके द्वारा दर्ज़ पहला ग्रहण मई 3, 1375 ई॰पू॰ मेँ घटित हुआ था.
  2. इतिहासकारों के अनुसार 22 अक्टूबर, 2134 ई.पू. यानि आज से 4153 साल पहले प्राचीन चीन मेँ लगने वाला सूर्य ग्रहण मानव इतिहास में दर्ज़ पहला सूर्य ग्रहण था.
  3. ह्सी और हो नाम के दो चीनी ज्योतिषियों को सूर्य ग्रहण की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के लिए मृत्युदंड दे दिया गया था। यही पहला दर्ज़ सूर्य ग्रहण था.
  4. ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के अनुसार, 585 ईसा पूर्व में एक सूर्य ग्रहण की वजह से लिडियन और मेड्स के बीच युद्ध रुक गया। दोनों पक्षों ने दिन मेँ अंधेरे आसमान को एक दूसरे के साथ शांति बनाने के संकेत के रूप में देखा.
  5. जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चन्द्रमा आता हे, तब सूर्य ग्रहण होता है.
  6. सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन ही होता है.
  7. खगौलीय विज्ञान के अंतर्गत ये घटना आती है.
  8. हिन्दू धर्म में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है.
  9. सूर्य ग्रहण के समय पशु-पक्षी भ्रमित हो जाते हैं.
  10.  एक पूर्ण सूर्य ग्रहण अधिकतम 7.5 मिनट तक रह सकता है.
  11. सन 1609 मेँ खगोल विज्ञानी जोहान्स केपलर ने पहली बार सूर्यग्रहण का पूर्ण वैज्ञानिक विवरण दिया.
  12. भारत मेँ धारणा है कि ग्रहण के दौरान पका हुआ भोजन दूषित हो जाता है लेकिन भारत के खगोलशास्त्री इससे सहमत नहीं हैं.

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